पेयजल यानि पीने का पानी दुर्लभ होता जा रहा है | आबादी में बढोतरी, मिटटी का रेगिस्तान में बदलना, प्रदुषण द्वारा बसे हुए एवं उपजाऊ जमीन को हानि पहुँचने के कारण पेयजल की मांग बढती ही जा रही है | जरूरतें बढ़ रही हैं और इन जरूरतों को संतुष्ट करने में प्रकृति की क्षमता घट रही है | अब केवल सेवन कम कर लेना काफ़ी नहीं है, बल्कि आवश्यक्ता है बड़े पैमाने पर जल (पानी) का उत्पादन करने का उपाय ढूंढना | यही उपाय हमारे पास यहाँ है |

 

जल सबसे महत्वपूर्ण संसाधन है जो नमी के रूप में सभी जगह हवा में उपस्थित है | इसे बड़े पैमाने पर स्थानीय रूप में निकाल पाने की क्षमता से रेगिस्तानी इलाके को जंगल में बदल पाना संभव है | इससे मौजूदा और पूर्व में स्थित जल प्रणालियों की कार्य क्षमता को पुनःस्थापित किया जा सकता है | एक स्वस्थ जल चक्र कृषि को बड़े पैमाने पर करने की अनुमति देता है और जीवित मिटटी जल प्रणाली के नियंत्रक की तरह काम करते हुए जल के जमाव को संचित रखता है | इससे वन्यजीवन की मजबूत वृद्धि होती है, स्थानीय लोगों के लिए अतिरिक्त संसाधन मिलते हैं एवं आहार सुरक्षा, टिकाऊपन में बढ़त मिलती है | हम एक उपाय प्रस्तावित करते हैं जो विश्व के सबसे गरीब इलाकों को आवश्यक संसाधनों तक पहुँच देगा जैसे की जल और बिजली |

 

यह प्रणाली भरी मात्रा में CO2 (> 256 टन प्रति हेक्टेयर) और जल वनस्पति एवं मिटटी में जमा करेगा | इससे पानी की कमी के कारण मिटटी के कमजोर होने की प्रक्रिया में कमी आयेगी | भूस्खलन, बाढ़, जंगल में लगने वाली आग, रेतीले तूफ़ान और सूखा पड़ना जैसी घटनायें बहुत अधिक तेजी से पुनः उत्सर्जित इलाकों में कम हो जाते हैं |

 

प्रणाली

हमारी प्रणाली निष्क्रिय रूप से अत्यधिक मात्रा में हवा से शुद्ध पानी उत्पन्न करने में सक्षम है | हमारी प्रणाली : पूरी तरह से निष्क्रिय रूप से काम कर सकती है या अन्य शब्दों में इसमें कोई विद्युतिकीय हिस्सा नहीं है और नाही इसे कोई औद्योगिक उत्पन्न उर्जा की आवश्यकता है | यह केवल प्राकृतिक उर्जा का इस्तेमाल करता है जैसे की सूर्य की ताप, दिन और रात में होने वाली तापीय अंतर और गुरुत्व | अतः यह प्रणाली वायु, रेत और धुल वाले रेगिस्तानी भूभाग में भी आदर्श रूप से काम करती है |

  • किसी भी स्थान पर इसे लगाया जा सकता है, उन सामग्री से जो अधिक मात्रा में सभी जगह उपलब्ध हैं |
  • एक बार बन जाने के बाद यह स्वायत्ता से काम करता है एवं बहुत सीमित रखरखाव की आवश्यकता पड़ती है |
  • प्रदुषण उत्सर्जित नहीं करता
  • प्रतिदिन लाखों लीटर जल उत्पन्न कर सकता है |

 

हम अभी कहाँ तक पहुंचे हैं

पांच वर्ष पूर्व इसका उद्गम हुआ | कई वर्षों तक जेरोम ने एक सिद्धांत और प्रणालियों पर काम किया जब तक की अंततः एक उपयुक्त और टिकाऊ उपाय पाया | साथ मिल कर हमने (डी. इ. डब्लु ) D.E.W स्थापित किया और अधिक द्रिश्य्ता पाने के लिए संस्थाओ एवं व्यापारिक संगठनो तक पहुंचे | हमने अपनी प्रणाली के कुछ पुर्जों की जाँच करने के लिए एक छोटा सा नमूना बनाया | सामाजिक संचार माध्यम पर हमारे कुछ चित्र देखें |

हम अब उस सार पर पहुँच चुके हैं जहाँ हम अकेले नहीं बढ़ सकते | हमे कार्य को बरक़रार रखने के लिय कोष की आवश्यकता है और सही साझेदार धुंडने में हमारी मदद करें |